Wednesday, November 8, 2023

बासी भोजन: अमृत पान

 बासी भोजन: अमृत पान


 


अक्सर जंगल के भ्रमण के लिए सुबह 6 बजे प्रवेश करना होता है। जब थकान से चूर मैं जंगल में एक कैम्प पर पहुँचा तब वहाँ लगी गिल्की पर मेरी नज़र पड़ी। मुझे भूख लग आयी थी। कैम्प में जब मैंने यह बात वहाँ उपस्थित व्यक्ति को बतायी तब पहले उसके चेहरे पर कुछ प्रश्न थे। फिर कुछ रुक कर उसने मुझसे कहा - ‘रात का कुछ चावल है और लौकी की सब्ज़ी है जिसमें मिर्च थोड़ी ज़्यादा है यदि आप ख़ाना चाहें तो।’ मैंने हामी भर दी और फिर मैंने कहा, ‘यहाँ कुछ गिल्की लगी हुई है क्या यह भी बना देंगे।’ फिर क्या था मैंने झट-पैट कुछ गिलकियाँ तोड़ी। मैंने उससे किचन में प्रवेश का आग्रह किया और वहाँ पहुँच कर रात के बचे हुए चावल को फ़्राई किया। एक एक पल सदियों सा बीत रहा था। फिर सिर्फ़ तेल, नमक और जीरे में तैयार हुई गिल्की की सब्ज़ी।

उस दौरान उन्होंने मुझे उनके कार्यों और कठिनाइयों के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया की किस तरह वो अपने कार्यों को बेहद पसंद करते हैं। मैं सुनता रहा और भोजन तैयार था। जब मैंने ख़ाना खा लिया तब लगा कि प्रेम से परोसी गई रात की वो बासी लौकी और चावल एवं गिल्की की ताज़ी सब्ज़ी किसी भी पाँच सितारा होटल के खाने से कहीं बेहतर थी।

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