डर था इस बात का गुम न हो जाएँ हम कहीं
कहीं नए युग के अंधियारों में
उजाले ऐसे की प्रकाश ही हर तरफ
फिर भी मिलता कोई नहीं मक़ाम .
डर था कंप्यूटर के इस युग में खो जाऊं न कहीं
0-1 के खेल में, कहीं खो न जाये मेरी पहचान,
सताता था मुझे कंप्यूटर का ज्ञान।
डर था की जिस तरह कंप्यूटर में हर बात
0 या 1 होती है उसी तरह मेरी जिंदगी भी
बक्से में बंद 0 या 1 न हो जाये।
आईडिया का विज्ञापन देख में कुछ और घबराया था।
आज नंदन ने यह सच कर दिया जब डाकिये ने
मुझे मेरा नंबर दिया जिसे दुनिया बड़े प्यार से कहती है
यूनिक आइ डी .
यह भले ही यूनिक हो लेकिन अब मै भी एक नंबर बन गया हूँ
मेरा वजूद भी कंप्यूटर रुपी इस दुनिया में एक नंबर हो गया है
मै 0-9 के बीच घूमता हूँ लेकिन दुनिया रुपी इस डब्बे में
खुद को ढूँढता हूँ। नहीं पता किसी को आज कौन है
पडोसी, कौन है रिश्तेदार, बस सबको पता है अपना आधार अपना आधार।
जिसने बना दिया मेरा संसार निराधार कैद कर मुझे एक नंबर में।
अब मै केवल एक नंबर हूँ हाँ अब मै केवल एक नंबर हूँ।
कहीं नए युग के अंधियारों में
उजाले ऐसे की प्रकाश ही हर तरफ
फिर भी मिलता कोई नहीं मक़ाम .
डर था कंप्यूटर के इस युग में खो जाऊं न कहीं
0-1 के खेल में, कहीं खो न जाये मेरी पहचान,
सताता था मुझे कंप्यूटर का ज्ञान।
डर था की जिस तरह कंप्यूटर में हर बात
0 या 1 होती है उसी तरह मेरी जिंदगी भी
बक्से में बंद 0 या 1 न हो जाये।
आईडिया का विज्ञापन देख में कुछ और घबराया था।
आज नंदन ने यह सच कर दिया जब डाकिये ने
मुझे मेरा नंबर दिया जिसे दुनिया बड़े प्यार से कहती है
यूनिक आइ डी .
यह भले ही यूनिक हो लेकिन अब मै भी एक नंबर बन गया हूँ
मेरा वजूद भी कंप्यूटर रुपी इस दुनिया में एक नंबर हो गया है
मै 0-9 के बीच घूमता हूँ लेकिन दुनिया रुपी इस डब्बे में
खुद को ढूँढता हूँ। नहीं पता किसी को आज कौन है
पडोसी, कौन है रिश्तेदार, बस सबको पता है अपना आधार अपना आधार।
जिसने बना दिया मेरा संसार निराधार कैद कर मुझे एक नंबर में।
अब मै केवल एक नंबर हूँ हाँ अब मै केवल एक नंबर हूँ।
