एक अनजान चेहरा लाखो की भीड़ मे,
हाथो मे चंद पैसे लिए हुए कुछ खाबों को सजाए।
कितना मजबूर ये अनजान चेहरा जिसे देख हर दिल रो जाए।
कुदरत का फ़ैसला कितना अजीब,
इसका हाथ खाली, जो कुचले इसे गाड़ी के नीचे है धनवान इतना की,
है फ़ैसला बिका उसके हाथों में।
क्यूँ इतना सस्ता ये जीवन बिक रहा रूह के व्यापार में।
कितने हैं ऐसे पुतले मिटटी के जो मर मिटते बिन मातम के।
ऐ अनजान पुतले कितने दिन तेरे बिन छत,
बिन कपड़े और बिन भोजन के निकले।
ढूँढती रही खामोशियाँ तुझे, बिन पाये.
कितने लोग जीते रहे बिन बताये,
तेरा जीवन सूना ही रहा,
गरीबी के आलम में सना हुआ।
यूँ तो हवा भी पहाडों को बनाती और विद्वंश करती है,
तेरी जिंदगी ये कायनात क्यों नही सवारती,
क्यों ये जीती है तेरी ही परछाई के अन्धकार में,
इनकार करते हुए तेरे अस्तित्व का,
वक्त भी तुझ पे ताना मारता है,
तू मिट क्यों नही जाता इस तिरस्कार में,
शायद तुझे अभी भी है आस रौशनी की,
शायद तुझे इन्तजार है सुबह का,
आएगी जो इस काली रात के बाद।
जागेगी काएनात, जिन्दगी होगी तेरी भी जिन्दगी.
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Tuesday, January 27, 2009
Thursday, May 29, 2008
पहचान
फिर बदल गई तस्वीर तेरी, नाम तेरा बदल गया,
तेरे होटो पे जो ग़ज़ल का पैमाना था वोह भी बदल गया,
तेरा ईमान भी बदल गया, बदल गई हर चीज़ वोह, पहचान जिसकी तुजसे थी,
तेरी पहचान, तेरा खुदा, तेरा पता, तेरी मिसाल, सब बदल गया,
एक अनजान था जब तुजसे मिला पहेली बार,
आज बेजान हूँ तुजसे मिलके आखरी बार,
कितनी खूबसूरत तेरी कहानी थी, तेरे आखों मे देखि जो तस्वीर वोह सयानी थी,
खंडहर हो गई वोह तस्वीर, खाबों मे जिसकी नींव तूने बनाई थी,
तेरा जिस्म बदल गया है, तेरी रूह खो गई है,
तेरी पहचान बदल गई है।
ऐ मेरे खुदा इंसान बदल गया है, इंसानियत बदल गई है,
तेरा कलमा पढ़ते थे हम कभी, अब हमारा इमान भी बदल गया है.
तेरे होटो पे जो ग़ज़ल का पैमाना था वोह भी बदल गया,
तेरा ईमान भी बदल गया, बदल गई हर चीज़ वोह, पहचान जिसकी तुजसे थी,
तेरी पहचान, तेरा खुदा, तेरा पता, तेरी मिसाल, सब बदल गया,
एक अनजान था जब तुजसे मिला पहेली बार,
आज बेजान हूँ तुजसे मिलके आखरी बार,
कितनी खूबसूरत तेरी कहानी थी, तेरे आखों मे देखि जो तस्वीर वोह सयानी थी,
खंडहर हो गई वोह तस्वीर, खाबों मे जिसकी नींव तूने बनाई थी,
तेरा जिस्म बदल गया है, तेरी रूह खो गई है,
तेरी पहचान बदल गई है।
ऐ मेरे खुदा इंसान बदल गया है, इंसानियत बदल गई है,
तेरा कलमा पढ़ते थे हम कभी, अब हमारा इमान भी बदल गया है.
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