Sunday, April 7, 2024

प्रत्यक्ष लक्षद्वीप

 





दुनिया में कुछ स्थान ऐसे होते हैं जो दुनिया के एक छोर पर होते हैं लेकिन असल में एक नये जीवन की शुरुआत का केंद्र होते हैं। भारत के एक छोर पर ऐसी ही एक जगह है लक्षद्वीप। हाल ही में मेरा लक्षद्वीप जाना हुआ। जब मैं वहाँ पहुँचा तो मन में सिर्फ़ एक ख़याल था कि यह दुनिया का कोई विस्मयकारी स्थान है। नीला आसमान, हरा, सफ़ेद, नीला, काला एवं ना जाने कौन-कौन से रंग का पानी। इतना साफ़ पानी कि आप गहराई पर समुद्र तल को देख लें। अलौकिक आकर्षण का केंद्र - लक्षद्वीप।

लक्षद्वीप जाना बहुत दुर्गम माना जाता है। यहाँ पहुँचने के लिये कोच्चि सबसे निकटतम स्थान है। कोच्चि के लिए देश के सभी राज्यों से हवाई एवं रेलसेवा उपलब्ध है। कोच्चि से जहाज़ के द्वारा वहाँ पहुँचने में लगभग 16 घंटे लगते हैं। वैसे लक्षद्वीप पहुँचने के लिये अब कोच्चि के अलावा बेंगलुरु से भी फ्लाइट प्रारंभ हो गई है जिससे लक्षद्वीप पहुँचना आसान हो गया है। अगत्ती द्वीप पर हवाई अड्डा है और बड़े जहाज़ के लिये एक छोटा हार्बर भी है। कोच्चि के अलावा मुंबई एवं गोवा से भी लोग यहाँ क्रूज़ में आते हैं।

लक्षद्वीप में बहुत से द्वीप हैं जिनमे बंगाराम सबसे अलौकिक है। वहाँ पहुँचते ही टूरिज्म विभाग के होटल मैनेजर तंसीर ने हमें द्वीप के बारे में बताया और हमारी जिज्ञासा और रोमांच को सातवें असमान पर पहुँचा दिया। यह एक छोटा सा द्वीप है जिसपर कोई स्थानीय आबादी नहीं है। बंगाराम में समुद्री एडवेंचर की सभी गतिविधियों का केंद्र है। जैसे स्नॉर्कलिंग, कयाकिंग, स्कूबा डाइविंग, स्विमिंग, स्पीड बोटिंग इत्यादि। साथ ही द्वीप पर घूमने, साइकिलिंग करने और फोटोग्राफी के लिये पर्याप्त ठिकाने हैं। पहुँचते ही आप समुद्र में छलांग लगाने से स्वयं को नहीं रोक पाते।

इस प्रकार एक टूरिस्ट के नज़ीरिये से समय बिताने के लिए बंगाराम में पर्याप्त व्यवस्था है। हम दरवेश्वरूद्दीन की नाव से अगत्ती से बंगाराम पहुँचे। रास्ते में दरवेश्वरूद्दीन ने हमें कोरल के बारे बताया और मछुआरों की कुछ कहानियाँ सुनाई और ना जाने 1 घंटे का सफ़र कैसे पूरा हो गया।

समुद्री जीवन आपको रोमांचित कर देता है ख़ास तौर से कोरल रीफ एवं विभिन्न प्रकार की मछलियाँ। समुद्र के अंदर की गतिविधियों को भाँपने के लिए स्नॉर्कलिंग एवं स्कूबा डाइविंग सबसे उपयुक्त गतिविधियाँ हैं। अमान ने हमें स्कूबा डाइविंग के हुनर सिखाये और मैं दंग रेह गया जब उन्होंने गहरे समुद्र में मुझे रंग बिरंगी मछलियों के अलावा शार्क, टर्टल और मंटा रे जैसे विशेष जीवों को दिखाया। शार्क देख कर तो मेरी रूह काँप गई लेकिन मन प्रसन्न हो गया। मैंने इसकी कभी कल्पना ही नहीं की थी। 

इन गतिविधियों से मैंने समुद्र और समुद्री जीवन के महत्व को बहुत बारीकी से समझा। लगा कि धरती पर जितनी विविधता है शायद उससे भी अधिक समुद्र के भीतर है। मन में बस यह भाव थे कि पर्यावरण को सुरक्षित रखना कितना आवश्यक है अन्यथा ग्लोबल वार्मिंग से सारे कोरल नष्ट हो जाएँगे और इतने सारे समुद्री जीव भी। जो समुद्र के रहस्यों में दिलचस्वी रखता है ऐसे पर्यावरणविद के लिये भी यह एक आदर्श स्थान है। स्थानीय लोगों का समर्पण और सेवा भाव आपका दिल जीत लेता है।

जितना सुंदर बंगाराम है उतना ही सुंदर अगत्ती भी है और ऐसे ना जाने लक्षद्वीप के कितने अन्य द्वीप। सब पर एक साथ जाना मेरे लिए संभव नहीं था लेकिन आप ज़रूर एक्स्प्लोर कर सकते हैं। अगत्ती एवं कवरत्ती पर रुकने के लिए होमस्टे एवं छोटे कॉटेज़ भी अच्छे विकल्प हैं। यह एक अलग दुनिया महसूस करने के लिए एक आदर्श झरोखा है।

जब पूर्णिमा की रात समुद्र के सामने बैठ मैं चिंतन कर रहा था तब लगा कि समुद्र में हलचल नहीं होती, ज्वार-भाटा नहीं आता तो समुद्र कितना नीरस लगता। बिना लहरों का समुद्र! क्या आप कल्पना कर सकते हैं? शायद नहीं। पानी का निकट आना फिर दूर जाना, पानी का तीव्र होना फिर शांत हो जाना, लहरों का आना और लौटना यह सब चंद्रमा के प्रभाव से होता है। चंद्रमा नहीं होता तो कितना कुछ नहीं होता। 

मुझे लगा कि हम जीवन के उतार-चढ़ाव से कितने प्रभावित होते हैं। परंतु समुद्र की तरह हमारे जीवन में भी उतार-चढ़ाव आवश्यक हैं अन्यथा हमारा जीवन भी ठहरे हुए पानी की तरह बहुत रसहीन हो जाएगा। लक्षद्वीप पर बिताये चंद दिनों का रोमांच तो थम गया था लेकिन कुछ मीठी सी यादों के साथ इस निष्कर्ष को लिए मैं अपने घर लौट रहा था।

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