अब हम अचंभित करने वाली भविष्य में ऐसी और कल्पनाओं को साकार होते भी देख सकते हैं जैसे कि इस्लामिक गणराज्य में हिंदू मंदिर स्थापित होना जो मूर्तिकला का एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। अब यह एक चमत्कार ही कहा जा सकता है कि एक मुस्लिम देश में यह विशाल हिंदू मंदिर धर्म, आस्था, कला और अद्यात्म का एक नया केंद्र बनने जा रहा है।
अबू धाबी के निकट स्वामी नारायण संस्था द्वारा बनाए जा रहे हिंदू मंदिर का भूमिपूजन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सन् 2018 में किया था। अब यह मंदिर बनकर तैयार है एवं इसका लोकार्पण आज प्रधानमंत्री मोदी जी के द्वारा किया जाना है।
कैसे नरेंद्र मोदी जी ने मुस्लिम शासकों को अबू धाबी में हिंदू मंदिर बनवाये जाने के लिये प्रेरित किया होगा? विचार करें। और कैसे स्वामी जी ने भारत के स्वाभिमान को वहाँ स्थापित करने के लिए जतन किए होंगे। यह मरुस्थल में एक मरीचिका की तरह लगता है।
मैं अपनी किताब के लिए स्वामी ब्रह्मविहारी जी से मिला था। मैंने साक्षात्कार के समय उनके व्यक्तित्व की गहराई को जाना था और इसीलिए यह भी कहना ग़लत नहीं होगा कि इस ऐतिहासिक कार्य के पीछे स्वामी नारायण संस्था के स्वामियों एवं उनके अध्यात्म की शक्ति का विशेष योगदान है, अन्यथा किसी का विश्वास जीतना आसान नहीं होता और धर्म के विषय में तो बिलकुल भी नहीं।
यह मंदिर जहां एक ओर इस्लाम की उदारता को उजागर करता है वहीं दूसरी ओर संस्था के कौशल एवं सामर्थ को दर्शाता है। मंदिर की भव्यता संस्था की रचनात्मकता, अखंडता, गंभीरता, संवेदनशीलता एवं चरित्र की विशालता को दर्शाती है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं की शीघ्र ही इस मंदिर को देखने लाखों लोग वहाँ पहुँचने लगें।
तो क्या यूं कहें की रेत में भी कमल खिलाए जा सकते हैं।



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