चौरागड़ पचमड़ी में स्थित सतपुड़ा की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है जहां देवों के देव महादेव का निवास है। हिंदू कैलेंडर के इस महत्त्वपूर्ण महाशिवरात्रि के दिन चौरागड़ की तलहटी में एक विशाल मेला आयोजित होता है जहां एक ही दिन में आस-पास के लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं। श्रद्धालु विशाल त्रिशूलों को लेकर चौरागड़ तक का सफ़र करते हैं और महादेव को प्रशन्न करने के लिए उसे मंदिर के पास स्थापित करते हैं। यह क्रम कई वर्षों से चला आ रहा है।
कालांतर में इन त्रिशूलों की संख्या इतनी अधिक होती गई कि बहुत से त्रिशूलों का उपयोग सीढ़ियों पर डिवाइडर के रूप में किया गया और कुछ का बाउंड्री बनाने में। लोगों की आस्था ने वहाँ इतना लोहा इकट्ठा कर दिया कि मंदिर के आस-पास के निर्माण के लिए शायद अब लोहा ले जाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है।
प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण चौरागड़ महादेव का यह सफ़र अद्भुत है। कभी बंदरों का समूह हमें सतर्क करता है तो कभी दोनों और गहरी खाई के बीच से होता हुआ ऊपर की और बढ़ता रास्ता। दूर-दूर तक पसरी शांति के मध्य “हर हर महादेव” के जयकारों के साथ जब हम मंदिर की ओर बढ़ते हैं और ईश्वर की प्रतिमा के दर्शन के लिए व्याकुल होते हैं तब चारों ओर पहाड़ों पर बिखरी हुई हरी चादर मन को सुकून प्रदान करती चली जाती है और हम मंत्र-मुग्ध से बिना थके बिना रुके बस आगे बढ़ते चले ज़ाते हैं।
मेले के समय पूरे रास्ते में दोनों ओर खाने-पीने, खिलौने, प्रसाद एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं की दुकानें लगी रहती हैं। यह मेला स्थानीय लोगों के लिए एक अवसर होता है जब वे साल भर के लिए कुछ आमदनी इकट्ठी कर लेते हैं। बाक़ी पूरे वर्ष भी नींबू-पानी, बेर, ककड़ी, अमरूद या सीता-फल की दुकानें रास्तों को सुसज्जित करती हैं और राहगीरों का मनोरंजन करती हैं।
चूँकि यह स्थान सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व का हिस्सा है इसलिए फारेस्ट विभाग का अमला मेले के समय विशेषतौर पर यहाँ उपस्थित रहता है। मेला प्राधिकरण और प्रशासन मेले की संपूर्ण व्यवस्था करते हैं और पूरे समय एलर्ट रहते हैं। मैंने आभास किया है कि प्रशासन के लगातार प्रयासों से दिन-प्रतिदिन व्यवस्थाओं में सुधार होता गया है और आज हम यह कह सकते हैं कि इस स्थान के दर्शन के लिए एक स्थाई व्यवस्था स्थापित हो गई है।
मैं इस मंदिर में इतनी बार आ चुका हूँ कि अब गिनती याद नहीं लेकिन फिर भी मुझे यहाँ बार-बार आने की इच्छा होती है और हर बार लगता है जैसे कि मैं पहली बार आया हूँ। यह ऊँचाई पर स्थित मात्र एक मंदिर नहीं बल्कि आस्था का एक ऐसा केंद्र है जो प्रत्येक सीढ़ी चढ़ने पर आपको आध्यात्म की गहराई में ले जाता है और भावनाओं से सराबोर कर देता है।
जब मंदिर में पहुँचकर हम अपनी आँखें बंद करते हैं और ईश्वर के ध्यान में लीन हो जाते हैं तब हम बार-बार अनुभव करते हैं कि जैसे हम किसी अनंत सागर की गहराई में चले जा रहे हों और फिर अंत में हमारे दिल के द्वार पर पहुँच गये हों। इसी प्रकार जब हम अपने दिल में झांकते हैं तब भी हम भावनाओं के महासागर से होते हुए फिर मंदिर में प्रकट होते हैं। इस भावना को व्यक्त करना इतना कठिन है कि बस मैं इतना कह सकता हूँ कि आप एक बार चौरागड़ महादेव जाइये और भावना के इस स्पंदन को स्वयं समझिए।
शिव आदि हैं, शिव अनंत हैं एवं शिव ही सत्य हैं।

